
दर्द जब हद से गुजर गया होगा
वो अपनी ही मौत मर गया होगा....
कल रात पुरवाई चली थी शायद
पुराना हर जख्म उभर गया होगा....
कितना टूटा था उम्र भर से वो शख्स
आईना था छूने से बिखर गया होगा....
बहुत बरसीं हैं बरसातें इस रुत में
मंजर का मंजर ही निखर गया होगा....
जो वक़्त पे किसी काम ना आया "राज"
वो इंसा हर एक नजर से उतर गया होगा....