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मंगलवार, जुलाई 01, 2014

बन गयी फिर इक कहानी खूबसूरत


बन गयी फिर इक कहानी खूबसूरत 
आँखों ने बहाया जब पानी खूबसूरत

गर पत्थर भी मारिये तो वो हँस देगा 
बहते हुए दरिया की रवानी खूबसूरत

इक शेर में जिक्र जो माँ का कर दिया 
हुयी फिर ग़ज़ल की बयानी खूबसूरत

गठीले जिस्म की नुमाइश भला क्या 
मुल्क पे निसार जो जवानी खूबसूरत

वो जुदा होकर भी मुझसे जुदा नहीं है 
दे गया है यादों की निशानी खूबसूरत

पर्त-दर-पर्त खुल गए 'राज़' किसी के 
मिली है इक तस्वीर पुरानी खूबसूरत

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