
जब भी ख़त में मौसम लिखना
मुझको उसमे सावन लिखना
खुद को कुरबत सब दे देना
मुझे हिज्र का आलम लिखना
इश्क में तेरे बन बैठे पागल
बात यही तुम हरदम लिखना
बादे सबा जब चले शहर से
आँखे अपनी पुरनम लिखना
सबसे मिलना हंसते रहना
मेरे जानिब सब गम लिखना
लौटूंगा मैं इक रोज देखना
इन्तजार बस कायम लिखना