कैसी चले रहे हो तुम चाल साहब
कर रहे हो इंसां को हलाल साहब
चूस कर के खून इन गरीबों का
हो रहे हो और मालामाल साहब
ये सियासत कलम से अच्छी नहीं
शायरी कर ना दे कोई बवाल साहब
तुम फरेबी हो दगाबाज हो झूठे हो
दिल में रखने का है मलाल साहब
"राज" शायर है, फ़कीर है, पागल है
झूठ कहके ना करेगा कमाल साहब