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मंगलवार, अप्रैल 28, 2009

वो अल्फाज़




उसने जाते जाते
कह दिया था
कि
जल्दी आ जाना
कहीं
देर न हो जाए
''
''
''
''
शायद वो सच कह गयी
"
"
"
"
आज भी
मेरी लाचारी,
बेबस वक़्त,
और
वो अल्फाज़,
उसकी तस्वीर के
खूंटे से टंगे हैं

2 टिप्‍पणियां:

  1. aah! itnaa marm......... itne se shabdonm mein aapne kitnaa kuch keh diyaa....

    bahut khoob...........:)

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  2. bas Vartika ji.....jajbe hain jo kabhi shabdo me dhal jaate hain

    उत्तर देंहटाएं

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