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शनिवार, दिसंबर 29, 2012




बुरी थी वो आदत, छोड़ दी 
लो हमने शराफत छोड़ दी 

जाना के कुछ नहीं हासिल 
फिर क्या इबादत छोड़ दी 

ये भी मजाक ही है मियाँ 
झूठ ने सियासत छोड़ दी 

मौसम-ए-खिज़ा में पत्तों ने  
शज़र से मुहब्बत छोड़ दी

इल्जाम सब उसपे ही लगे 
वो जिसने बगावत छोड़ दी  

नाम ही दिल्ली रह गया बस    
दिल की तो रवायत छोड़ दी  

2 टिप्‍पणियां:

  1. कहें लफ्जो-अल्फाजो-हर्फ़ बर्के-गरदाँ..,
    लो आज हमने ये किताबत छोड़ दी.....

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