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शनिवार, जुलाई 21, 2012

कभी मीठी तो, कभी है खारी जिंदगी




कभी मीठी तो, कभी है खारी जिंदगी 
सच कहूँ मगर है बहुत प्यारी जिंदगी 

कभी सिसके तो कभी पागलों से हँसे 
तेरी याद में कुछ यूँ है गुजारी जिंदगी 

जीने की हद तक तो तुम जियो यारों 
क्या हुआ जो क़ज़ा से है हारी जिंदगी 

कभी ख्वाब देखते, कभी आरज़ू लिए 
कट रही है बस अब यूँ हमारी जिंदगी 

उसके बगैर भी अपनी तो कटेगी "राज़" 
बस उसे ही रहेगा मलाल सारी जिंदगी 

13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब....
    और इसी तर्ज़ पर हमारी भी गज़ल पढ़िए...
    http://allexpression.blogspot.in/2012/06/blog-post_19.html

    :-)
    अनु

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार के  चर्चा मंच  पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. वाह !
    बहुत सुंदर तरीके से
    शब्दों में संवारी है जिंदगी !!

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  4. बहुत सुन्दर ऐसी ही जिंदगी..
    बहुत खूबसूरती से जिंदगी के अहसास को
    रचना में उतारा है..
    बेहतरीन ...
    :-)

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  5. आप सभी गुणीजनों का बहुत बहुत धन्यवाद....
    यूँ ही हौसला अफजाई करते रहें.... आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह ... बहुत खूब
    कल 25/07/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    '' हमें आप पर गर्व है कैप्टेन लक्ष्मी सहगल ''

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  7. कनपुरिया राज साहब आप छ गए हैं ,अशआर सारे भा गएँ हैं .

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