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रविवार, जून 10, 2012



सुबह से चल निकले हैं, शाम तक पहुँच ही जायेंगे 
ये चाँद सितारे अपने मक़ाम तक पहुँच ही जायेंगे 

आप बस लफ़्ज़ों के जुगाली यूँ ही करते रहिएगा 
दो-चार अशआर तो अंजाम तक पहुँच ही जायेंगे 

अभी तो बज़्म में पहली ही मुलाक़ात हुयी है उनसे 
फिर से मिले तो दुआ-सलाम तक पहुँच ही जायेंगे 

ये इश्क के किस्से हैं, बदनाम कर देंगे हम दोनों को 
उसके नाम से चले हैं मेरे नाम तक पहुँच ही जायेंगे 

9 टिप्‍पणियां:

  1. वाह...बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  2. बहूत हि बेहतरीन गजल है....सुंदर:-)

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  3. उनके नाम से चले हैं मेरे नाम तक पहुँच जायेंगे !
    खूबसूरत ग़ज़ल!

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  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  5. बेशक बहुत खूब सूरत अश आर ,उम्मीदे आशिक का भी क्या कहिये ..... .कृपया यहाँ भी पधारें -
    वैकल्पिक रोगोपचार का ज़रिया बनेगी डार्क चोकलेट
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/06/blog-post_03.html और यहाँ भी -
    साधन भी प्रस्तुत कर रहा है बाज़ार जीरो साइज़ हो जाने के .
    गत साठ सालों में छ: इंच बढ़ गया है महिलाओं का कटि प्रदेश (waistline),कमर का घेरा
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    लीवर डेमेज की वजह बन रही है पैरासीटामोल (acetaminophen)की ओवर डोज़
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

    इस साधारण से उपाय को अपनाइए मोटापा घटाइए ram ram bhai
    रविवार, 3 जून 2012
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

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  6. फिर से मिले तो दुआ सलाम तक ......
    बहुत खूब
    ज़िन्दादिली से लिखी गयी ग़ज़ल

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  7. सुंदर अभिव्यक्ति ...

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  8. आप सभी गुणीजनों का बहुत बहुत धन्यवाद....
    यूँ ही हौसला अफजाई करते रहें.... आभार

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