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मंगलवार, मई 08, 2012

कट रही है ये जिन्दगी जिन्दगी की तलाश में



कभी गम की तलाश में 
कभी ख़ुशी की तलाश में 
कट रही है ये जिन्दगी
जिन्दगी की तलाश में 

मैंने पूछा, के "ऐ हवा  
तू भटकती है यूँ क्यूँ .."
जवाब आया के "रहती हूँ 
मैं किसी की तलाश में " 

ना बहर सीखी कभी ना 
वज़न नापा लफ़्ज़ों का
बस सफहे ही रंगे हमने 
शायरी की तलाश में  

हमने तो इश्क में उसको 
खुदा का दर्जा है दे दिया 
आप सर मारिये पत्थर पे   
हाँ, बंदगी की तलाश में 

7 टिप्‍पणियां:

  1. वाह................
    कट रही है जिंदगी...जिंदगी की तलाश में.....

    बहुत सुंदर.

    अनु

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  2. क्या कहने???
    बहूत हि बढीया रचना...

    उत्तर देंहटाएं

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