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गुरुवार, अगस्त 19, 2010

अपनी दुआओं में तुझे माँगा है


उड़ती घटाओं में तुझे माँगा है 
महकी फिजाओं में तुझे माँगा है 

जब ही इबादत में हाथ उठायें हैं 
अपनी दुआओं में तुझे माँगा है 

रात ख्वाबों में भी आई हों जब
दिल की सदाओं में तुझे माँगा है 

आईने से जब जी भर गया अपना 
फिर इन निगाहों में तुझे माँगा है 

थके जब सफ़र में तन्हा चलते-२ 
शजर की छावों में तुझे माँगा है

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया गजल!
    --
    आपकी दुआओं को किसी की नजर न लगे♥3

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  2. रूप भाई साब...आभार...वक़्त देने के लिए

    संगीता जी....हमेशा की तरह से आप की तवज्जो रही...शुक्रिया

    संजय भाई.......शुक्रिया ....

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