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शुक्रवार, जुलाई 02, 2010

मेरे दिल में हैं कितने गम दोस्तों


मेरे दिल में हैं कितने गम दोस्तों 
अब सुनाये तुम्हे क्या हम दोस्तों 

यूँ तो बरसीं शहर में बरसातें बहुत 
तश्नगी फिर भी हुई ना कम दोस्तों 

हुए बेताब कितने वो चाँद और तारे 
शाम से शब् थी कितनी नम दोस्तों 

वक़्त-ए-रुखसत थमीं ना आँखें मेरी 
बहुत बेबस सा था वो अलम दोस्तों 

उनकी गलियां तो छूटीं पर यादें नहीं 
हुए किस्मत के ये भी सितम दोस्तों 

इश्क की राहों में ना मंजिल मिली 
तन्हा फिरे कदम दर कदम दोस्तों 

उसे टूट कर चाहा या चाह करके टूटे  
उमर भर को रहा फिर भरम दोस्तों 

3 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. Sunil bhai saab.......shukriya.... waqt dene ke liye... aabhaari hu,,,,,, khush rahiye

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