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वो मेरा होकर भी मुझसे जुदा रहा जब भी मिला बस खफा खफा रहा क्या मौसम आये क्या बादल बरसे कहाँ ख्याल सर्द आहों के सिवा रहा वक़्त ने यूँ म...
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जाने कैसा दीवाना हूँ मैं, जाने कैसी वहशत है तेरा इश्क है पागलपन है, या ये मेरी आदत है गुल में तेरा चेहरा देखूं, झील ये आँखें लगती हैं हर शै ...
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हर इक चेहरे में तेरा चेहरा लगे है हिज्र में मुझको सब सेहरा लगे है मेरी हर सदा नाकाम लौट आयी मुझे तो ये खुदा भी बहरा लगे है जाग उठा हू...
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जो भी यहाँ सच की रह-गुजर चले उसके घर पे यारों फिर पत्थर चले मैं दुश्मनों से तो वाकिफ था मगर मेरी पीठ पर दोस्तों के खंजर चल...
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शाम फिर से मुस्कराने लगी उसकी याद जब यूँ आने लगी चराग खुद-ब-खुद ही जल उठे रौशनी उसे ही गुनगुनाने लगी संदली हवा छूके उसके गेसू चली सा...
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जुनूँ जाने कैसा वो, उस रोज मेरे सर में था जिससे बिछड़ना था मैं उसी के शहर में था बेतरतीबी में जीस्त की आराम से गुजरी ...
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झूठ का अब बोलबाला हो गया है और सच का मुँह काला हो गया है चापलूस सर पे जाकर बैठ गए हैं सच्चे का देश निकाला हो गया है ये सिय...
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ख्यालों में आपका आना जाना रात भर फिर चश्मे--तर का मुस्कुराना रात भर हर इक आहट पे है आपकी आमद लगे मेरा दरवाजे तक नज़रें उठाना रात भर आप...
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बन गयी फिर इक कहानी खूबसूरत आँखों ने बहाया जब पानी खूबसूरत गर पत्थर भी मारिये तो वो हँस देगा बहते हुए दरिया की रवानी खूबसू...
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फलता-फूलता खूब साधू संतो का व्यापार भारत में क्यों कि फैला है अन्धविश्वास अपरम्पार भारत में कहीं मिलता कोई आसा तो कोई देता...
सोमवार, नवंबर 23, 2015
शुक्रवार, नवंबर 13, 2015
फिर से मौसम को कुछ और अच्छा बनाया जाय
फिर से मौसम को कुछ और अच्छा बनाया जाय
आओ मोहब्बत का नया सिलसिला बनाया जाय
जिससे मिलने को हर घड़ी ही बेताब रहे ये दिल
किसी आवारा बादल से चलो रिश्ता बनाया जाय
ना तुझको हासिल है कुछ, ना मुझको हासिल है
तो नफरतों को क्यों अपना हिस्सा बनाया जाय
क्यों हो बेकार में ही बहर-ओ-अदब की तिजारत
सब के पल्ले पड़े यूँ अशआर हल्का बनाया जाय
बात सियासी करते हैं पर सियासत नहीं करते
अब बेवजह ना हम जैसों को नेता बनाया जाय
आँधियों से भी लड़ने लगे हैं आजकल चराग ये
ऐसी हकीकत पे चलो कुछ किस्सा बनाया जाय
कह दीजिये आप अपनी आरज़ू ''राज'' लफ़्ज़ों में
ग़ज़ल को इस तरह कुछ और मीठा बनाया जाय
शुक्रवार, अक्टूबर 30, 2015
सर गवाना पड़ सकता है
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कुछ इस तरह ग़मों को छिपाना पड़ सकता है
दर्द ज्यादा होगा तो मुस्कराना पड़ सकता है
दस्तार को संभालने की फ़िक्र छोड़ दे ऐ बंदे
मुश्किल हालात हैं, सर गँवाना पड़ सकता है
झूठ का कारोबार कर तो रहे हो मगर सोच लो
कभी सच का भी परचम उठाना पड़ सकता है
रुठते हो जो तुम तो रूठ जाओ कोई बात नहीं
याद रखो के हम रूठे तो मनाना पड़ सकता है
नहीं समझे है मोहब्बत को, रस्म जमाने की
नाम दिल पे ना लिख, मिटाना पड़ सकता है
अदावत करो पर जेहन में ये बात रखो "राज "
नज्र मिली तो हाथ भी मिलाना पड़ सकता है
मंगलवार, मार्च 31, 2015
भारत में
फलता-फूलता खूब साधू संतो का व्यापार भारत में
क्यों कि फैला है अन्धविश्वास अपरम्पार भारत में
कहीं मिलता कोई आसा तो कोई देता है बस झांसा
ऐसे करते हैं सभी अपना अपना कारोबार भारत में
यूँ कहने को तो करोड़ों पैदा हो चुके हैं इस जमीन पे
आड़े वक़्त मगर नहीं लेता है कोई अवतार भारत में
गरीबों का हक़ मारकर के अमीरों की जेबें भरती है
करती है काम गैर-सरकारी, यहाँ सरकार भारत में
कई मजलूम सड़ जाते है बेगुनाही साबित करते-२
कई हीरो बने रहते हैं उमर भर, गुनहगार भारत में
हो जाए कोई हादसा तो कुछ ऐसे पेश आते हैं लोग
मदद छोड़कर बनाते हैं वीडियो समझदार भारत में
अजब चलन है 'राज', सच कहिये तो बुरा लगता है
पूजते हैं पत्थर, करते इन्सां से दुर्व्यवहार भारत में
KK
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