रूठ कर जिंदगी और क्या ले जायेगी
बस मेरे ये जिस्म-ओ-जाँ ले जायेगी
चरागों तुम जरा खामोश जला करना
अदा इक-इक तुम्हारी हवा ले जायेगी
हमारे बाद ही तो तुम हमको तरसोगे
जब ख़ामोशी हमारी सदा ले जायेगी
हयात के परदे गिर जायेंगे उस रोज़
क़ज़ा जिस दिन हमे छुपा ले जायेगी
वाह ..
जवाब देंहटाएंबहुत खूब !!
बहुत खूबसूरती से शिकायत दर्ज की ..उम्दा
जवाब देंहटाएंbahut khubsurati se bhavo ko vykt karate hai aap....
जवाब देंहटाएंचरागा तुम जरा खामौश जला करना
जवाब देंहटाएंअदा तुम्हारी एक एक हवा ले जायेगी...
बहुत खूब...
बहुत सुंदर प्रस्तुति !!
जवाब देंहटाएंआभार आप सभी का.....यूँ ही हौसला अफजाई करते रहें....
जवाब देंहटाएंbahut achha likha hai
जवाब देंहटाएंshubhkamnayen