बड़ी मुश्किलों से आज सोया हुआ है
ये दर्द मेरा कितनी रातें रोया हुआ है
उसकी चाहत बस चाहत ही रह गयी
ख्वाब में पाया, सच में खोया हुआ है
निखर के आ गया है चेहरा सहर का
शब् ने आंसुओं से इसे धोया हुआ है
देखो के महकती हुई ग़ज़ल आ गयी
लफ़्ज़ों में हमने दर्द को बोया हुआ है